जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के रमजान के पवित्र महीने के दौरान एकतरफा सीज़फायर की बात पर बीजेपी के विरोध से एक बार फिर दोनों सहयोगी पार्टियों के बीच मतभेद उजागर हो गए हैं. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा तक नहीं हुई जबकि इस मसले पर महबूबा आमराय की बात कह रही हैं. नेशनल कांफ्रेस का आरोप है कि खुद पीडीपी के भी किसी विधायक ने इस मसले को नहीं उठाया. बताया जाता है कि एकतरफा सीजफायर की बात सिर्फ इंजीनियर राशिद ने की थी, जो एक निर्दलीय विधायक हैं. इधर गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वाजपेयी सरकार के दौरान एकतरफा सीजफायर की बात कहकर गुमराह करने की कोशिश है, उस दौरान सेना हटाई नहीं गई थी सिर्फ घेराबंदी और तलाशी अभियान टाले गए थे.
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